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जियो, मेरे

जियो, मेरे आज़ाद देश की शानदार इमारतो जिनकी साहिबी टोपनुमा छतों पर गौरव ध्वज तिरंगा फहरता है लेकिन जिनके शौचालयों में व्यवस्था नहीं है कि निवृत्त होकर हाथ धो सकें। (पुरखे तो हाथ धोते थे न? आज़ादी ही से हाथ धो लेंगे, तो कैसा?) जियो, मेरे आज़ाद देश के शानदार शासको जिनकी साहिबी भेजे वाली […]

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शब्द और सत्य

यह नहीं कि मैंने सत्य नहीं पाया था यह नहीं कि मुझको शब्द अचानक कभी-कभी मिलता है दोनों जब-तब सम्मुख आते ही रहते हैं प्रश्न यही रहता है : दोनों अपने बीच जो दीवार बनाए रहते हैं मैं कब, कैसे उनके अनदेखे उसमें सेंध लगा दूँ या भर विस्फोटक उसे उड़ा दूँ? कवि जो होंगे, […]

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सर्जना के क्षण

एक क्षण भर और रहने दो मुझे अभिभूत : फिर जहाँ मैंने सँजोकर और भी सब रखी हैं ज्योति:शिखाएँ वहीं तुम भी चली जाना-शांत तेजोरूप। एक क्षण भर और लंबे सर्जना के क्षण कभी भी हो नहीं सकते। बूँद स्वाती की भले हो, बेधती है मर्म सीपी का उसी निर्मम त्वरा से वज्र जिससे फोड़ता […]

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मैं वहाँ हू

दूर-दूर-दूर… मैं वहाँ हूँ। यह नहीं कि मैं भागता हूँ : मैं सेतु हूँ-जो है और जो होगा दोनों को मिलाता हूँ- मैं हूँ, मैं यहाँ हूँ, पर सेतु हूँ इसलिए दूर-दूर-दूर… मैं वहाँ हूँ। यह तो मिट्टी गोड़ता है। कोदई खाता है और गेहूँ खिलाता है उसकी मैं साधना हूँ। यह जो मिट्टी फोड़ता […]

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रिश्ता

खत में लिखा था जो तुमने लौटने की तारीख बस वही तारीख कैलेंडर में देखती हूँ दिन रात सोचती हूँ कैलेंडर का तारीख से रिश्ता क्या है तो लगता है हमारी जिंदगी एक कैलेंडर है और इनकी तारीखे रिश्ते -नाते कैलेंडर बदल जाते हैं तारीखे आगे बढ़ती जाती हैं छत पर रखे गमले में जो […]

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आज तुम शब्द न दो

आज तुम शब्द न दो, न दो, कल भी मैं कहूँगा। तुम पर्वत हो अभ्रभेदी शिलाखंडों के गरिष्ठ पुंज चाँपे इस निर्झर को रहो, रहो। तुम्हारे रंध्र-रंध्र से तुम्हीं को रस देता हुआ फूटकर मैं बहूँगा। तुम्हीं ने दिया यह स्पंद। तुम्हीं ने धमनी में बाँधा है लहू का वेग यह मैं अनुक्षण जानता हूँ। […]

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जब भी तेरी गली से गुजरे हम

जब भी तेरी गली से गुजरे हम … तेरी याद की सड़क पर उखड़ा हो जैसे एक पत्थर और दिल की गाड़ी को लगा हो जोर का झटका और स्मृतियों के गले से उतर आया नीचे कुछ हसीं लम्हों का निवाला जब भी तेरी गली से गुजरे हम … जैसे काँटों में उलझ गया हो […]

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Strange are the ways of life

Dear Life, strange are your ways, You never cease to amaze me, bewilder me, sometimes even inspire me, Feels like I have gone through your full circle, met you, known you, lived every moment of yours. Alas, I am wrong. You prove me wrong every time. You bring me back to the forgotten alleys of […]

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नदी के द्वीप

हम नदी के द्वीप हैं। हम नहीं कहते कि हमको छोड़कर स्रोतस्विनी बह जाए। वह हमें आकार देती है। हमारे कोण, गलियाँ, अंतरीप, उभार, सैकतकूल- सब गोलाइयाँ उसकी गढ़ी हैं। माँ है वह, इसी से हम बने हैं। किंतु हम हैं द्वीप। हम धारा नहीं हैं। स्थिर समर्पण है हमारा। हम सदा से द्वीप हैं […]