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काँगड़े की छोरिया

काँगड़े की छोरियाँ कुछ भोरियाँ सब गोरियाँ लालाजी, जेवर बनवा दो खाली करो तिजोरियाँ काँगड़े की छोरियाँ। ज्वार-मका की क्यारियाँ हरियाँ-भरियाँ-प्यारियाँ धान खेतों में लहरें हवा की सुना रही हैं लोरियाँ काँगड़े की छोरियाँ। पुतलियाँ चंचल कलियाँ कानों झुमके बालियाँ हम चौड़े में खड़े लुट गए बनी न हमसे चोरियाँ- काँगड़े की छोरियाँ काँगड़े की […]