नाजनीन दीदी से मुलाकात
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नाजनीन दीदी से मुलाकात

लेखक – डॉ. संगीता झा गार्गी के पिता पेशे से वकील थे और उनके एक बहुत खास मित्र थे पाशा अंकल। जब भी गर्ग साहब रायपरु आते पाशा अकंल से जरूर मिलत। एक बार तो इन चारां सखियों को लेकर पाशा अंकल के यहां गए। वहां उनके यहां तो जैसे एक मिनी जू था। तोते, रंगीन […]

सेकेंड एम.बी.बी.एस.-1
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सेकेंड एम.बी.बी.एस.-1

लेखक – डॉ संगीता झा पूरी मेडिकल पढ़ाई में सेकेंड एम.बी.बी.एस. को मेडिकल पढ़ाई का सुनहरा काल कहे तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। यही समय रहता है जब स्टूडेंट्स एनाटाॅमी और फिजियोलाॅजी के टेन्स वातावरण के बाहर आते हैं, बल्कि पहली बार मरीजों को हाथ से छनू े का अवसर मिलता ह।ै पढ़ाई के साथ-साथ […]

फर्स्ट एम.बी.बी.एस. इम्तिहान
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फर्स्ट एम.बी.बी.एस. इम्तिहान

लेखक  – डॉ. संगीता झा अब तो सब जोर-शोर से पढ़ने में ही लगे थे। एक्जाम जो सर पर थे। धुले सर का दसूरे मेिडकल कालॅजे में ट्रांसफर हो गया था आरै एनाटोमी वही एक्सटरनल बन कर आने वाले थे। इससे एनाटाॅमी के सारे टीचर बड़े रिलेक्स्ड थे कि इस बात तो पुराने रीपिटर्स भी पास […]

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अपनी तो निकल पड़ी

फर्स्ट टमिर्नल परीक्षाएं हो गयी थीं आरै कॉलेज एक महीने के लिए बदं था। रिजल्ट भी ठीक-ठाक ही था, लेकिन इस बार बाबूजी अम्मा किसी से नहीं कह पा रहे थे कि सुनीति अपराजिता है। कक्षा में सर्वप्रथम आयी है क्योंकि यहां तो सभी सुनीति थे या उससे बढ़कर। इन छुट्टियों में सुनीति का मन ही घर […]

बदले रंग
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बदले रंग

लेखक – डॉ संगीता झा ये सुनीति के जीवन में पिछले पांच महीनों में सबसे अच्छा दिन साबित हुआ। उस दिन शीतल और गार्गी से जो दोस्ती की शुरूआत हुई वो आज तक जारी है। दोनों आज भी डाॅ. सुनीति की अभिन्न मित्रा हैं। अब शुभदा की असलियत का पता अंकिता को भी चल गया […]

कुछ खट्टी कुछ मीठी – 2
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कुछ खट्टी कुछ मीठी – 2

कहां तो सुनीति की जिंदगी में रंग थे, सपने थे, उत्साह था, उमंग थी और न जाने ईश्वर ने उसकी जिदंगी को कितनी सारी  से नवाजा था आरै सब कछु अब सुनीति को धराशायी नज़र होता आ रहा था। पर करे भी तो क्या करे, ओखली में सिर दे दिया है तो मूसल का क्या डर। […]

कुछ खट्टी कुछ मीठी
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कुछ खट्टी कुछ मीठी

लेखक – डॉ संगीता झा हास्टल के दरवाजे पर जूनियर्स का स्वागत करने के लिए हास्टल में रहने वाली सीनियर्स के अलावा डे स्कालर्स (घर से कालेज आने वाले) सीनियर लड़कियां भी थीं। सबकी जुबान पर बस एक नाम था सुनीति चौहान। जो भीड़ में सिर झुकाए खड़ी जरूर थी, पर अपने कुरते से अपनी सुड […]

हॉस्टल का पहला दिन
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हॉस्टल का पहला दिन

लेखक – डॉ संगीता झा सब संयोग ही तो है। न कालेज में स्टांइक होती, न सुनीति को एक अनोखी रैगिंग का सामना सिर्फ एक दिन के लिए ही करना पड़ता, न सुनीति को सही माप के कपड़े सिलाने का समय मिलता, न उस रैगिंग से सबक लेकर वो एक आज्ञाकारी सुनीति बनने का प्रण लेती, […]

कॉलेज का पहला दिन
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कॉलेज का पहला दिन

लेखक – डॉ. संगीता झा आज कॉलेज का पहला दिन था। रात से ही सुनीति ने अपनी सफेद ड्रेस प्रेस कर रखी थी। काले जूते भी टनाटन पालिश थे। दो काले फीते बिस्तर के किनारे रख दिए। सुबह छ: बजे की लोकल पकड़ कर उसे रायपरु जाना था। कलेजा निकलकर हाथों में आ रहा था। जहां एक […]