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यह दीप अकेला

यह दीप अकेला स्नेह भरा है गर्व भरा मदमाता, पर इसको भी पंक्ति को दे दो। यह जन है : गाता गीत जिन्हें फिर और कौन गाएगा? पनडुब्बा : ये मोती सच्चे फिर कौन कृती लाएगा? यह समिधा : ऐसी आग हठीला विरला सुलगाएगा। यह अद्वितीय : यह मेरा : यह मैं स्वयं विसर्जित : […]

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काँगड़े की छोरिया

काँगड़े की छोरियाँ कुछ भोरियाँ सब गोरियाँ लालाजी, जेवर बनवा दो खाली करो तिजोरियाँ काँगड़े की छोरियाँ। ज्वार-मका की क्यारियाँ हरियाँ-भरियाँ-प्यारियाँ धान खेतों में लहरें हवा की सुना रही हैं लोरियाँ काँगड़े की छोरियाँ। पुतलियाँ चंचल कलियाँ कानों झुमके बालियाँ हम चौड़े में खड़े लुट गए बनी न हमसे चोरियाँ- काँगड़े की छोरियाँ काँगड़े की […]

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कलगी बाजरे की

हरी बिछली घास। दोलती कलगी छरहरी बाजरे की। अगर मैं तुमको ललाती साँझ के नभ की अकेली तारिका अब नहीं कहता, या शरद् के भोर की नीहार न्हायी कुँई। टटकी कली चंपे की, वगैरह, तो नहीं, कारण कि मेरा हृदय उथला या सूना है या कि मेरा प्यार मैला है बल्कि केवल यही : ये […]