Posted by
Posted in

सावन-मेघ

घिर गया नभ, उमड़ आए मेघ काले, भूमि के कंपित उरोजों पर झुका-सा, विशद, श्वासाहत, चिरातुर- छा गया इंद्र का नील वक्ष-वज्र-सा, यदि तड़ित से झूलता हुआ-सा। आह, मेरा श्वास है उत्तप्त- धमनियों में उमड़ आई है लहू की धार- प्यार है अभिशप्त : तुम कहाँ हो नारि? मेघ व्याकुल गगन को मैं देखता था, […]

Posted by
Posted in

उड़ चल हारिल

उड़ चल हारिल, लिए हाथ में यही अकेला ओछा तिनका। ऊषा जाग उठी प्राची में-कैसा वाट, भरोसा किन का। शक्ति रहे तेरे हाथों में-छुट न जाए यह चाह सृजन की; शक्ति रहे तेरे हाथों में-रुक न जाए यह गति जीवन की। ऊपर-ऊपर, ऊपर-ऊपर-बढ़ा चीरता चल दिङ्मंडल : अनथक पंखों की चोटों से नभ में एक […]

Posted by

Optimistic Approach Is The Biggest Strength To Fight The Difficult Situations of Life.

Author – Dr. Shalini Agam Positive approach that thrashes all the negative thoughts proves to be useful for us. These are not only bookish talks but these are the things which can be experienced in our lives. I have an example for this. One of the students came to learn Reiki from me because somebody had […]

Posted by

Anger : How To Overcome

Author – Dr. Shalini Agam We come across many moments in life when we become unhappy and our “self” get harted because of someone’s behaviour then we develop aversion and anger. But we are bound due to some reasons and are therefore not able to show our anger. If the feeling of anger and hatred remaining […]

Posted by
Posted in

रहस्यवाद

मैं भी एक प्रवाह में हूँ- लेकिन मेरा रहस्यवाद ईश्वर की ओर उन्मुख नहीं है मैं उस असीम शक्ति से संबंध जोड़ना चाहता हूँ अभिभूत होना चाहता हूँ- जो मेरे भीतर है। शक्ति असीम है- मैं शक्ति का एक अणु हूँ मैं भी असीम हूँ। एक असीम बूँद असीम समुद्र को अपने भीतर प्रतिबिंबित करती […]

Posted by
Posted in

उधार

सवेरे उठा तो धूप खिल कर छा गई थी और एक चिड़िया अभी-अभी गा गई थी। मैंने धूप से कहा : मुझे थोड़ी गरमाई दोगी उधार? चिड़िया से कहा : थोड़ी मिठास उधार दोगी? मैंने घास की पत्ती से पूछा : तनिक हरियाली दोगी- तिनके की नोक-भर? शंखपुष्पी से पूछा : उजास दोगी- किरण की […]

Posted by
Posted in

धर्म संकट

लेखक – अमृतलाल नागर   शाम का समय था, हम लोग प्रदेश, देश और विश्‍व की राजनीति पर लंबी चर्चा करने के बाद उस विषय से ऊब चुके थे। चाय बड़े मौके से आई, लेकिन उस ताजगी का सुख हम ठीक तरह से उठा भी न पाए थे कि नौकर ने आकर एक सादा बंद […]

Posted by
Posted in

काबुलीवाला

लेखक –  रविन्द्र नाथ टैगोर मेरी पाँच बरस की लड़की मिनी से घड़ीभर भी बोले बिना नहीं रहा जाता। एक दिन वह सवेरे-सवेरे ही बोली, “बाबूजी, रामदयाल दरबान है न, वह ‘काक’ को ‘कौआ’ कहता है। वह कुछ जानता नहीं न, बाबूजी।” मेरे कुछ कहने से पहले ही उसने दूसरी बात छेड़ दी। “देखो, बाबूजी, […]