hostelलेखक – डॉ संगीता झा

सब संयोग ही तो है। न कालेज में स्टांइक होती, न सुनीति को एक अनोखी रैगिंग का सामना सिर्फ एक दिन के लिए ही करना पड़ता, न सुनीति को सही माप के कपड़े सिलाने का समय मिलता, न उस रैगिंग से सबक लेकर वो एक आज्ञाकारी सुनीति बनने का प्रण लेती, न सुनीति की दुर्दशा देख पहले दिन बनी उसकी सहेलियां उससे कुछ दूरी बनाती।
पंद्रह दिनों के बाद वो दिन आया जिसकी न तो सुनीति ने बेसब्री से प्रतीक्षा की थी, न ही गोल चक्कर लगा ब्रं̃ांड में घूमने की कल्पना की थी। बलिक सुनीति तो इस दिन को लेकर काफी डरी हुर्इ थी। उसने मन ही मन प्रण भी कर लिया था कि वह सभी सीनियर्स की बातें सिर झुका कर सुनेगी। हास्टल की जिंदगी की कल्पना भी उसे डरा रही थी। दुर्ग में ही गार्गी और शीतल ने निशिचत कर लिया था कि वे हास्टल में एक साथ रहेंगी। गरिमा को भी अदिति वर्मा मिल गयी थी। सुनीति को हास्टल में सिक्ता भाटिया बतौर रुममेट मिली।
हास्टल में रहने वाले सीनियर्स तो पहले से ही सुनीति चौहान की प्रतीक्षा में बेताब थे। भिलार्इ के ही अंकिता लोखंडे और शुभदा मिश्रा भी रुममेट बन गए। अंकिता, शुभदा, शीतल, गार्गी, गरिमा, अदिति ये सब सीनियर्स की नजरों में अच्छे आरै भले जूि नयर्स थ।े सुनीति आरै उसके साथ रहने के कारण सिक्ता ही सीनियर्स की रैगिंग का शिकार बनने वाले थे। सोच-सोच कर ही सुनीति डर से आधी हुए जा रही थी। सुनीति का जोश और उसकी खुशी लगभग काफूर हो चुकी थी।
सुबह हास्टल पहुंच कमरे में सामान रख जल्दी-जल्दी सभी कालेज के लिए निकल पड़े। फस्र्ट एम.बी.बी.एस. में एनाटामी, फिजियोलाजी और बायो केमिस्टंी ये तीन विषय पढ़ाए जाते हैं। एनाटामी में डेड बाडी का डिसेक्शन करना पड़ता है

और वही पहला पीरियड था जिसमें सबको डेडबाडी के सामने दो घंटे बैठना था। बाप रे बाप, पुरे डिस्कशन हॉल में  फार्म लिन की ब,ू काले काले लेते हुए शव। सुनीति डर के मारे कांपने लगी अभी तक अपनी जिंदगी में किसी का शव नहीं देखा था। नानाजी की मृत्यु पर भी वह नहीं जा पायी थी। किसी तरह थूक गिटकते हुए अपने आपको मजबूत करने की कोशिश की। यही हाल उसकी सभी सहेलियों का था। लड़के काफी उत्साहित थे। सभी विधार्थियों को 12-12 के ग्रुप में बांटकर एक-एक टेबल में बिठा दिया गया। ज्यादातर लड़कियों का नाम एस से शुरू होने से सुनीति की टेबल में सात लड़कियां और पांच लड़के थे। कालेज में पहले दिन हुर्इ सुनीति की दुर्गति को कोर्इ नहीं भूला था, इससे सुनीति पूरे सहपाठियों के लिए मजाक का विषय बनी हुर्इ थी। लड़के धीरे-धीरे बुदबुदा भी रहे थे सुनीति बहन जिंदाबाद। सुनीति तो पहले दिन दोनों हाथों के नाखुनों से खेलती हुर्इ सिर झुकाए पुस्तक में सर गड़ाए बैठी हुर्इ थी। यहां तो अंग्रेजी का बोलबाला था और सुनीति की पूरी पढ़ार्इ हिंदी माध्यम से हुर्इ थी। डिस्केटर (एशेक्सन कैसे करना है, बताने वाली पुस्तक) में लिखे हुए अंग्रेजी शब्द आँखों के सामने डासं कर रहे थे आरै सनु ीति मन ही मन खीज रही थी क्या ये तरीका है डाक्टर बनने का? मैं तो अपनी पुरानी सुनीति ही भली। इससे अच्छा मैं एम.एस.सी. कर कालेज में प्रोफेसर बन जाती। किसी तरह सर झुकाए पहले दिन को याद करते हुए सुनीति ने दो घंटे एनाटामी डिसेक्सन हाल में बिताए। बाकी सारी लड़कियां आपस में बातें कर रही थी और लड़के भी अपने पुराने कालेज के किस्से सुना रहे थे। ज्यादातर लोगों की शिक्षा अंग्रेजी माध्यम से ही हुर्इ थी। उससे उनके सामने अंग्रेजी के अक्षरों के नाचने का प्रश्न ही नहीं उठता था।

एनाटोमी के बाद फिजियोलॉजी की कलास थी, जहां एनाटाम ी में शरीर की रचना पर डिस्कस किया जाता है वहीं फिजियालेाज कीकलास में शरीर के अगं किस तरह काम करते हंै पढ़ाई की जाती है| आदमी आक् सीजन लके र काबर्न डार्इ आक् साइड कैसे छोड़ता है। किस तरह शरीर के सभी अंगों में शुद्ध रक्त ं̂दय के द्वारा भेजा जाता है? कैसे गुर्दा 1⁄4किडनी1⁄2 शरीर से अमोनिया यूरिया जैसे हानिकारक तत्वों को मूत्रा द्वारा बाहर निकालता है? इत्यादि इत्यादि। ये सबजेक्ट थोड़ा इंटरटेनिंग लग रहा था। आखिरी क्लास बायाकेेि मस्टीं की थी, जिसमें काबार्हेाइडटें , पा्र टे ीन आरै वसा के स्टक्ं चर से लके र वे कसैे काम करते ह,ंै कसैे शरीर द्वारा निकाले जाते ह,ंै के विषय में पढ़ाया जाता था।
काल जे का पहला दिन सिर झुकाए बिना किसी हादसे के बीत गया। एनाटाम ी के सारे टीचर इस बात का पूरा ध्यान रख रहे थे कि जूनियर बच्चों की रैगिंग न हो। कालेज खत्म होने के बाद सुनीति सर झुकाए हास्टल की तरफ निकल पड़ी जो कालेज से सिर्फ सौ कदम की दूरी पर था।