केंचुलें हैं, केंचुलें हैं, झाड़ दो।

छल मकर की तनी झिल्ली फाड़ दो।

साँप के विष-दाँत तोड़ उघाड़ दो।

आजकल यह चलन है, सब जंतुओं की खाल पहने हैं-

गले गीदड़ लोमड़ी की

बाघ की है खाल काँधों पर

दिल ढँका है भेड़ की गुलगुली चमड़ी से

हाथ में थैला मगर की खाल का

और पैरों में

जगमगाती साँप की केंचुल

बनी है श्रीचरण का सैंडल

किंतु भीतर कहीं

भेड़-बकरी, बाघ-गीदड़, साँप के बहुरूप के अंदर

कहीं पर रौंदा हुआ अब भी तड़पता है

सनातन मानव-

खरा इनसान-

क्षण भर रुको उसको जगा लें।

नहीं है यह धर्म, ये तो पैंतरे हैं उन दरिंदों के

रूढ़ि के नाखून पर मरजाद की मखमल चढ़ाकर

यों विचारों पर झपट्टा मारते हैं-

बड़े स्वार्थी की कुटिल चालें

साथ आओ-

गिलगिले ये साँप बैरी हैं हमारे

इन्हें आज पछाड़ दो

यह मगर की तनी झिल्ली फाड़ दो

केंचुलें हैं, केंचुलें हैं, झाड़ दो।

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सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन

मूल नाम : सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन
जन्म : 7 मार्च 1911, कुशीनगर, देवरिया (उत्तर प्रदेश)
भाषा : हिंदी, अंग्रेजी
विधाएँ : कहानी, कविता, उपन्यास, निबंध, नाटक, यात्रा वृत्तांत, संस्मरण
मुख्य कृतियाँ
कविता : भग्नदूत, चिंता, इत्यलम्, हरी घास पर क्षण भर, बावरा अहेरी, इंद्रधनु रौंदे हुए ये, अरी ओ करुणा प्रभामय, आँगन के पार द्वार, पूर्वा, सुनहले शैवाल, कितनी नावों में कितनी बार, क्योंकि मैं उसे जानता हूँ, सागर-मुद्रा, पहले मैं सन्नाटा बुनता हूँ, महावृक्ष के नीचे, नदी की बाँक पर छाया, ऐसा कोई घर आपने देखा है (हिंदी) प्रिज़न डेज़ एंड अदर पोयम्स (अंग्रेजी)
उपन्यास : शेखर : एक जीवनी, नदी के द्वीप, अपने अपने अजनबी, बीनू भगत
कहानी संग्रह : विपथगा, परंपरा, कोठरी की बात, शरणार्थी, जयदोल, ये तेरे प्रतिरूप
यात्रा वृत्तांत : अरे यायावर रहेगा याद, एक बूँद सहसा उछली
निबंध : सबरंग, त्रिशंकु, आत्मपरक, आधुनिक साहित्य : एक आधुनिक परिदृश्य, आलवाल, संवत्सर
संस्मरण : स्मृति लेखा
डायरी : भवंती, अंतरा, शाश्वती
नाटक : उत्तरप्रियदर्शी
अनुवाद : गोरा (रवींद्रनाथ टैगोर – बाँग्ला से)
संपादन : तार सप्तक (तीन खंड), पुष्करिणी, रूपांबरा (सभी कविता संकलन), सैनिक, विशाल भारत, प्रतीक, दिनमान, नवभारत टाइम्स (हिंदी), वाक्, एवरीमैंस (अंग्रेजी)
सम्मान
साहित्य अकादमी पुरस्कार, ज्ञानपीठ पुरस्कार
निधन
4 अप्रैल 1987