mbbs-exam

लेखक  – डॉ. संगीता झा

अब तो सब जोर-शोर से पढ़ने में ही लगे थे। एक्जाम जो सर पर थे। धुले सर का दसूरे मेिडकल कालॅजे में ट्रांसफर हो गया था आरै एनाटोमी वही एक्सटरनल बन कर आने वाले थे। इससे एनाटाॅमी के सारे टीचर बड़े रिलेक्स्ड थे कि इस बात तो पुराने रीपिटर्स भी पास हो जाएंगे ऐसी सबको आशा थी। एनाटामी फिजियोलाजी आरै बायोकेमिस्ट्री में एनाटोमी ही पसीने छुड़ा देने वाला सब्जेक्ट है । अब तो गरिमा और गार्गी ने पढ़ने का नया तरीका अपना लिया था। उन्होंने सुनीति के हाथों को अपनी जागीर मान लिया था वे दोनों कापी की जगह सुनीति के दोनों हाथों में पेन से लिख-लिख कर याद करते थे। टेंशन ज्यादा होने पर उसे नोच-नाच भी लेते थे। शीतल चिल्लाती रही थी कि – ‘‘पढ़ने का ये क्या तरीका है, इंसानों की तरह बीहेव करो और सुनीति तू तो पागल है, तू क्यों इन्हें लिखने देती है।’’ सुनीति मुस्कराती रहती थी क्योंकि ये एक अजब दोस्ती थी, अजब प्रेम था हालांकि उस पेन से लिखे हाथांे से पने की लिखाई छडु ा़ ने मंे सनु ीति को काफी मशक्कत करनी पडत़ ी थी, हाथ जो नीले-नीले हो जाते थे सो अलग। सब सहमे डरे हुए थे कि कहीं एनाटाॅमी में फेल ना हो जाए लेकिन सुनीति तो बिल्कुल मस्त थी। चिंता कोसों दूर थी।
किसी तरह से सबने तीनांे विषयांे के थ्यारे ी एक्जाम दे दिए अब पै्रि क्टकल की बारी थी उसमें भी उतने ही नंबर पाने थे और वहां तो वाइवा में सोचने का टाइम भी नहीं मिलना था।
एनाटाॅमी प्रैक्टिकल में काफी रोमांचक वाकये हुए। धुले सर एक्सटरनल बन कर आए थे सभी टीचर्स बड़े रिलेक्स्ड मूड में थे।
सुनीति अब वाइवा के लिए गयी तो उन्होंने उससे पूछा- ‘‘तुम्हारी तबियत तो ठीक है? पीरियड्स तो नहीं चल रहे हैं?’’ उन्हें होली वाला वाकया अच्छी तरह से याद था। सभी टीचर्स खिलखिला कर हंसने लगे। सुनीति तो बस शर्म से लाल हो गयी।

एक मलेशियन लड़का भी एक्जाम दे रहा था। उसने पूछा- टेल मी द कोर्स आॅफ रेडियल नर्व (हाथों में एक रेडियल नर्व होती है वो कहां से कहां कैसे जाती है) उस लड़के ने दाहिने हाथ की उंगली से बाएं हाथ को छूते हुए रेडियल नर्व के रास्ते मंे उगं ली घुमाकर बता दिया। धुले सर ने कहा- ‘‘यसू यवू र माउथ मनै ’’ (मुहं का इस्तेमाल कर) उनका मतलब था कि मुंह खोल कर बताओ। लेकिन उस मलेि शयन लड़के माहे म्मद कासिर ने अपने हाठे ांे को हाथ पर रख महंु को ही रेि डयल नर्व के कार्से पर घमु ा दिया, फिर टीचर्स ठहाका लगाने लग।े टश्ंे ान मंे बठै े विद्याथिर्य ांे को समझ नहीं आ रहा था कि ये लेाग किस बात पर हंस रहे हैं। उसके बाद एक आरै रीपिटर धरमसिहं की बारी आयी। उसे एक फीमर बाने ले उसे ताले ने के अदं ाज में बोला- बहुत भारी लगती है सर, पंजाब की ही होगी। फिर हंसी के फव्वारे फूट उठे। डाॅ. दास तो पेट पकड़-पकड़ कर हंसने लगे।

धुले सर ने कहा छोड़ो इसे और उसके सामने एक स्पेसिमेन रखा जिसको दख्े ाकर र्काइे भी बता सकता था कि ये बने्र ह।ै उससे उन्होंने पूछा – ‘‘व्हाटॅ इज दिस नाइदर यू हेव नाॅर आई, टेल में क्विकली’’ धरमसिंह तुरंत चिल्लाया- ब्रेस्ट। अब तो टीचर्स की कुर्सियों से नीचे लुढ़कने की बारी थी। धुले सर ने उसे वापस भेजते हुए कहा- ‘‘पहली बार एक्जाम लेने में इतना मजा आ रहा है।’’ फिर बारी आयी अबू सलमे की। वो भी रिपीटर था आरै तंजानिया से था उसके हाथ मंेपैिल्वक  बोन (कूल्हे की हड्डी )- ‘‘व्हसू बाने इज दिस।’’ उनका मतलब था आरै आरैत या आदमी की।दास सर ने हिन्ट दने के  लिए मडै म की तरफ अपनी काहेनी हिलाई। बस फिकर क्या था, अबू सलेम चिल्लाया- ‘‘मुखर्जी मैडम की।’’ मैडम तो शर्म से लाल होकर बोली- ‘‘अरे मुझे मारने में क्यों लगे हो जीती जागती तुम्हारे सामने बैठी हूं और मेरी बोन बता रहे हो।’’

इसी तरह बड़े ही खश्ु ानमु ा माहालै मंे फस्र्ट एम.बी.बी.एस. के इम्तिहान हो गए और सुनीति अपनी सहेलियों के साथ बड़े आराम से फस्र्ट एम.बी.बी.एस. पास हो गयी। डाक्ॅ टर साहिबा ने अपनी जिदं गी के पहले पायदान को बड़ी खबू सरू ती से पार कर फतेह हासिल कर ली।
फस्र्ट एम.बी.बी.एस. के एक्जाम हाते े ही एक महीने की गर्मी की छुि टट् यां हइु र्। सभी हास्ॅ टल छाडे ़ वापस एक महीने घर चले गए आरै छुि टट् यांे मंे एकाध बार आपस में मिले और बेसब्री से सभी काॅलेज खुलने का इंतजार कर रहे थे क्योंकि सभी को हाॅस्टल में बड़ा मज़ा आ रहा था, सीनियर्स जो हो गए थे।