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लेखक – डॉ संगीता झा

हास्टल के दरवाजे पर जूनियर्स का स्वागत करने के लिए हास्टल में रहने वाली सीनियर्स के अलावा डे स्कालर्स (घर से कालेज आने वाले) सीनियर लड़कियां भी थीं। सबकी जुबान पर बस एक नाम था सुनीति चौहान। जो भीड़ में सिर झुकाए खड़ी जरूर थी, पर अपने कुरते से अपनी सुड सुड बहने वाली नाक को बार-बार पोंछते जा रही थी। उसके साथ हास्टल में रहने वाली सातों लड़कियों ने उसकी हरकत से उससे एक दूरी बना ली। एक सीनियर ए ने जोर से सुनीति को डांटा- ”डर्टी गर्ल, गो एंड वाश युवर हैंडस। सुनीति सुड सुड करते हुए बाथरूम की ओर दाडै ऩे लगी। दसू री सीनियर चिल्लाइर्- जगं ली बदतमीज इतना भी शउर नहीं कि चल कर जाए। सीनियर्स के सामने हिम्मत तो देखो, दौड़ कर जा रही है। सुनीति के हाथ धाके र आने के बाद सारी सीनियर्स कारे स में चिल्लाइर्- सुनीति बहन हमें हमारे  ने धमकी दी है कि उनकी बहन की रैगिंग अगर ली गयी तो वे हम सबकी ऐसी की तैसी कर देंगे। सो हमारी जुर्रत हम तुमसे कुछ पूछें बेहतर होगा कि तमु मुर्गा बनकर कोने में खड़े हो जाओ आरै हर पाचं मिनट में ककु डकू़ू जारे -जारे से बोलते रहना और एक घंटे बाद तुम्हें अंडे पर बैठ उसमें से चूजा निकालना है, चूजा कैसे निकलेगा हम बताएंगे। सुनीति तो डर के मारे कोने में खड़े दोनों हाथों को पैरों के पीछे से निकाल कान पकड़ कर मुर्गा बन गयी। बीच-बीच में कुकड़ूकू कर आवाज भी लगाती जा रही थी। बाकी सारी सो काल्ड गुड जूनियर्स को कुछ छोटी-मोटी हरकतें करने को कहा जा रहा था। अंकिता लोखंडे गाना बहुत अच्छा गाती थी तो उसके गाने तारेा मन दपणर् कहलाए, पर सभी सीनियर्स अवाक रह गए अभी गाने के बाद क्षण भर की चुप्पी ही थी कि सुनीति की जोर से कुकड़ूकू की आवाज आर्इ और सीनियर्स ठहाका मार कर हंसने लगे। सभी ने अंकू की पीठ थपथपार्इ। किसी ने किसी एडवर्टइजमेंट, जैसे आयोडेक्स का ”आयोडेक्स मलिए, काम पर चलिए ऐसी एकिटंग कर दिखार्इ। किसी ने बिनाका टूथपेस्ट के एडवर्टइजमेंट पर अपनी साफ सफेद दंतपंकित दिखार्इ। जब सिक्ता की बारी आयी तो बचेारी पटले राडे वजे पटटे राडे वजे दाबेारा बाले ी। एक सीनियर सी ने कहा आगे कहा…..तो सिक्ता बाले ी बस आगे भी इसी तरह बाले ते जाना ह।ै सभी हसं ने लग।े सुनीति के पैरों में बहुत दर्द हो रहा था, लेकिन बेचारी चुप रही। अंकू से एक और गाने की फरमाइश की गयी जिसे उसने बखबू ी निभाया आरै मानाें समा सा बध्ां गया। फिर चुप्पी सुनीति की कुकड़कूू से टटू ी। किसी को भी सनु ीति पर दया नहीं आ रही थी। उसी हास्टल में सुनीति को पहले जानने वाली रीमा श्रीवास्तव दीदी रहती थी जो इन रैगिंग लेने वाले सीनियर्स से दो साल और सीनियर थी। उन्होंने सबको डाटं कर कहा छाडे ़ो इस बचेारी का।े सनु ीति की तो जान में जान आइर्, भला हो रीमा दीदी का जो उन्हानेें वहां आकर सनु ीति को बचा लिया। सुनीति को किसी ने बताया था कि वहां रीमा श्रीवास्तव से मिल लेना। इसके बाद सभी जूनियर्स को एक्जाम गोइंग सीनियर्स के रूम अलाट किए गए जहां उन्हें सुबह जाकर नाश्ता और चाय बनाना था आरै यही प्रि क्रया शाम को फिर दाहे रानी थी। सनु ीति को रीता गप्ु ता आरै हरजीत का रूम मिला। दोनों ने चिल्लाना शुरू किया। ये कार्टून हमें नहीं चाहिए तो सबने समझाया अच्छी रैिगगं लनेा रूम में भी,खबू काम कराना तब इस बदतमीज की अकल ठिकाने आएगी। बचेारी सुनीति सिर झकुाए सबु कने लगी। सीनियर्स का जत्था एक साथ चिल्ला उठा ”इस घडि़याल को देखो कैसे झूठे आंसू बहा रही है। खरै एक साल में इसे छठी का दध्ूा याद न दिलाया तो हम भी सीनियर्स नही।ं  बाप रे बाप, सनु ीति की कल्पनाएं धएु ं में उड़ने लगी।ं वो क्या करेगी कैसे इस वातावरण में जिएगी। इतनी बुरी तो वो कहीं से भी नहीं है जितना ये लोग समझ रहे हैं। हां, थोड़ी अल्हड़ बदमाश और सिरफिरी जरूर है। सुनीति को रीमा दीदी में आशा की किरण दिखार्इ दी। रीमा सुनीति के अंदर के अच्छेपन को जानती थी। तीन महीने के बाद रीमा दीदी लोगों के भी सेकेंड एम.बी.बी.एस. के एक्जाम होने वाले थे। सुनीति लंगड़ाती लंगड़ाती रीमा दीदी के कमरे में पहुंची। वहां बैठी उनकी सभी सहेलियों को नब्बे डिग्री झुककर गुड इविनिंग किया रीमा हंसने लगी- ”अरे यहां यह सब करने की जरूरत नहीं है  तेरे पैर दुख रहे होंगे अच्छे से कुर्सी पर बठै जा। बस उनका बाले ना खत्म ही नहीं हअुा। सुनीति धड़ से फैल कर कुर्सी पर बठै गयी। उनकी बाकी सहेलियां रुखसार, नीलू और विमल ने कहा- ”तेरी दोस्त बड़ी तेज है रीमा इसलिए सब इसकी रैि गगं ले रहे हंै पर है बड़ी मजदेार। सुनीति  का दख्ुा रीमा से दख्ेाा नहीं गया। उन्हानेें सनु ीति से जस्ट सीनियर बचै की लीडर को बलुाकर कहा सुनीति कल से हम चारों के लिए नाश्ता और चाय बनाएगी। लेकिन सुनीति ने कहा कोर्इ बात नहीं मैं रीता गुप्ता और हरजीत दीदी के रूम में भी जाउंगी। उस सीनियर के जाने के बाद रीमा, नीलू, विमल ने सुनीति की कान खिंचार्इ की- मूर्ख, तुझे बचाने के लिए हमने प्लान बनाया और तू खुद फंसना चाहती है, तू क्या सोच रही है तेरी बहती नाक और कुर्ते पर चिपकी गंदगी देखने के बाद हम तेरे हाथ से बना नाश्ता भी खाएंगे। सुनीति ने फिर सारी कहा। रीमा दीदी फिर उसके बचाव में उतरी- ”जस्ट चिल यार हर चीज को इतना सीरियसली लेने की जरूरत नहीं है। रैि गगं का आनदं ले जब तक काइेर्  फिजिकल वाय लसें नहीं है काइेर्  परश्ेाानी की बात नहीं है। जब चाहे हमारे रूम मेें आ सकती है। उन्होंने उसकी हालत देखते हुए एक दर्द निवारक टैबलेट भी दी और सुनीति अपने रूम वापस आ गयी। उसकी रूममेट सिक्ता भी गुस्से से भरी बैठी थी। ”रैगिंग से सीधे कहां चली गयी थी, देख तेरे इंतजार में मैं भूखे बैठी हुर्इ हूं। दोनों सखियां साथ मिलकर रामवती के मेस में गयी जहां उसके बैच की सारी लड़कियां खाना खाकर जा चुकी थी और कोने में उनकी जरमन सिलवर की प्लेटें और कटोरियां पड़ी थीं जिनको एक कुत्ता चाट रहा था। सुनीति की तो ये देख घिग्गी बंध गयी, पर क्या करे पेट में चूहे कूद रहे थे। अंदर किचन में बड़े-बड़े एल्युमिनियम के पतीलों से चिपका थोड़ा चावल, दाल और सब्जी बची थी। रामवती भी शाम का सौदा लाने बाजार गयी थी। सारे पतीले खुले हुए थे। डर लगा कहीं कुकुर महाशय ने यहां भी तो मुंह नहीं लगाया है। दोनों ने किसी तरह चमचाें आरै हाथ की मदद से पतीले से चिपकी खरुचन को अपनी थाली में डाल किसी तरह बेमन से खाना खाया। मन बड़ा बोझिल हो गया। सच में इस तरह सामना होगा ये तो सुनीति की कल्पना से परे था। गले में स्टेथो लटकाने के लिए एसे ी अगिन परीक्षा से गजु रना पडत़ा ह।ै ये तो बदाशर्् त के बाहर था लेि कन चलो धीरे-धीरे इसकी भी आदत हो जाएगी, ऐसा सोच उसने अपने आप को ढांढस बध्ाांया आरै कमरे में आकर रात का खाना खाए बिना दानेाें मित्रा बिस्तर पर ढरे हो गयी। इस तरह हास्टल के पहले दिन का अंत भी हो गया।