कवि, हुआ क्या फिर

तुम्हारे हृदय में यदि लग गई है ठेस?

चिड़ी दिल की जमा लो मूँठ पर (ऐहे, सितम, सैयाद!)

न जाने किस झरे गुल की सिसकती याद में बुलबुल तड़पती है

न पूछो दोस्त, हम भी रो रहे हैं लिए टूटा दिल।

(‘मियाँ, बुलबुल, लड़ाओगे?’)

तुम्हारी भावनाएँ जग उठी हैं।

बिछ चलीं पनचादरें ये एक चुल्लू आँसुओं की डूब मर, बरसात!

सुनो कवि! भावनाएँ नहीं हैं सोता, भावनाएँ खाद हैं केवल

जरा उनको दबा रखो- जरा-सा और पकने दो, ताने और तपने दो

अँधेरी तहों की पुट में पिघलने और पचने दो;

रिसने और रचने दो-

कि उनका सार बनकर चेतना की धरा को कुछ उर्वरा कर दे;

भावनाएँ तभी फलती हैं कि उनसे लोक के कल्याण का अंकुर कहीं फूटे।

कवि, हृदय को लग गई है ठेस? धरा में हल चलेगा।

मगर तुम तो गरेबाँ टोहकर देखो

कि क्या वह लोक के कल्याण का भी बीज तुममें है।

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सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन

मूल नाम : सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन
जन्म : 7 मार्च 1911, कुशीनगर, देवरिया (उत्तर प्रदेश)
भाषा : हिंदी, अंग्रेजी
विधाएँ : कहानी, कविता, उपन्यास, निबंध, नाटक, यात्रा वृत्तांत, संस्मरण
मुख्य कृतियाँ
कविता : भग्नदूत, चिंता, इत्यलम्, हरी घास पर क्षण भर, बावरा अहेरी, इंद्रधनु रौंदे हुए ये, अरी ओ करुणा प्रभामय, आँगन के पार द्वार, पूर्वा, सुनहले शैवाल, कितनी नावों में कितनी बार, क्योंकि मैं उसे जानता हूँ, सागर-मुद्रा, पहले मैं सन्नाटा बुनता हूँ, महावृक्ष के नीचे, नदी की बाँक पर छाया, ऐसा कोई घर आपने देखा है (हिंदी) प्रिज़न डेज़ एंड अदर पोयम्स (अंग्रेजी)
उपन्यास : शेखर : एक जीवनी, नदी के द्वीप, अपने अपने अजनबी, बीनू भगत
कहानी संग्रह : विपथगा, परंपरा, कोठरी की बात, शरणार्थी, जयदोल, ये तेरे प्रतिरूप
यात्रा वृत्तांत : अरे यायावर रहेगा याद, एक बूँद सहसा उछली
निबंध : सबरंग, त्रिशंकु, आत्मपरक, आधुनिक साहित्य : एक आधुनिक परिदृश्य, आलवाल, संवत्सर
संस्मरण : स्मृति लेखा
डायरी : भवंती, अंतरा, शाश्वती
नाटक : उत्तरप्रियदर्शी
अनुवाद : गोरा (रवींद्रनाथ टैगोर – बाँग्ला से)
संपादन : तार सप्तक (तीन खंड), पुष्करिणी, रूपांबरा (सभी कविता संकलन), सैनिक, विशाल भारत, प्रतीक, दिनमान, नवभारत टाइम्स (हिंदी), वाक्, एवरीमैंस (अंग्रेजी)
सम्मान
साहित्य अकादमी पुरस्कार, ज्ञानपीठ पुरस्कार
निधन
4 अप्रैल 1987