हरी बिछली घास।

दोलती कलगी छरहरी बाजरे की।

अगर मैं तुमको ललाती साँझ के नभ की अकेली तारिका

अब नहीं कहता,

या शरद् के भोर की नीहार न्हायी कुँई।

टटकी कली चंपे की, वगैरह, तो

नहीं, कारण कि मेरा हृदय उथला या सूना है

या कि मेरा प्यार मैला है

बल्कि केवल यही : ये उपमान मैले हो गए हैं।

देवता इन प्रतीकों के कर गए हैं कूच।

कभी बासन अधिक घिसने से मुलम्मा छूट जाता है

मगर क्या तुम नहीं पहचान पाओगी :

तुम्हारे रूप के, तुम हो, निकट हो, इसी जादू के

निजी किस सहज गहरे बोध से, किस प्यार से मैं कह रहा हूँ-

अगर मैं यह कहूँ-

बिछली घास हो तुम

लहलहाती हवा में कलगी छरहरे बाजरे की?

आज हम शहरातियों को

पालतू मालंच पर सँवरी जुही के फूल-से

सृष्टि के विस्तार का, ऐश्वर्य का, औदार्य का

कहीं सच्चा, कहीं प्यारा एक प्रतीक

बिछली घास है

या शरद् की साँझ के सूने गगन की पीठिका पर दोलती

कलगी अकेली

बाजरे की।

और सचमुच, इन्हें जब-जब देखता हूँ

यह खुला वीरान संसृति का घना हो सिमट जाता है

और मैं एकांत होता हूँ समर्पित।

शब्द जादू हैं-

मगर क्या यह समर्पण कुछ नहीं है

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सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन
मूल नाम : सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन
जन्म : 7 मार्च 1911, कुशीनगर, देवरिया (उत्तर प्रदेश)
भाषा : हिंदी, अंग्रेजी
विधाएँ : कहानी, कविता, उपन्यास, निबंध, नाटक, यात्रा वृत्तांत, संस्मरण
मुख्य कृतियाँ
कविता : भग्नदूत, चिंता, इत्यलम्, हरी घास पर क्षण भर, बावरा अहेरी, इंद्रधनु रौंदे हुए ये, अरी ओ करुणा प्रभामय, आँगन के पार द्वार, पूर्वा, सुनहले शैवाल, कितनी नावों में कितनी बार, क्योंकि मैं उसे जानता हूँ, सागर-मुद्रा, पहले मैं सन्नाटा बुनता हूँ, महावृक्ष के नीचे, नदी की बाँक पर छाया, ऐसा कोई घर आपने देखा है (हिंदी) प्रिज़न डेज़ एंड अदर पोयम्स (अंग्रेजी)
उपन्यास : शेखर : एक जीवनी, नदी के द्वीप, अपने अपने अजनबी, बीनू भगत
कहानी संग्रह : विपथगा, परंपरा, कोठरी की बात, शरणार्थी, जयदोल, ये तेरे प्रतिरूप
यात्रा वृत्तांत : अरे यायावर रहेगा याद, एक बूँद सहसा उछली
निबंध : सबरंग, त्रिशंकु, आत्मपरक, आधुनिक साहित्य : एक आधुनिक परिदृश्य, आलवाल, संवत्सर
संस्मरण : स्मृति लेखा
डायरी : भवंती, अंतरा, शाश्वती
नाटक : उत्तरप्रियदर्शी
अनुवाद : गोरा (रवींद्रनाथ टैगोर – बाँग्ला से)
संपादन : तार सप्तक (तीन खंड), पुष्करिणी, रूपांबरा (सभी कविता संकलन), सैनिक, विशाल भारत, प्रतीक, दिनमान, नवभारत टाइम्स (हिंदी), वाक्, एवरीमैंस (अंग्रेजी)
सम्मान
साहित्य अकादमी पुरस्कार, ज्ञानपीठ पुरस्कार
निधन
4 अप्रैल 1987